घरेलू रेटिंग एजेंसी केयरएज रेटिंग्स की एक यूनिट द्वारा जारी की गई इस रिपोर्ट के मुताबिक क्विक कॉमर्स कंपनियों का ग्रॉस ऑर्डर वैल्यू (GOV) वित्त वर्ष 2027-28 तक 3 गुना से भी ज्यादा होकर 2 लाख करोड़ रुपये तक पहुंचने का अनुमान है।
वित्त वर्ष 2024-25 में ब्लिंकिट, जेप्टो, इंस्टामार्ट जैसी क्विक कॉमर्स कंपनियों को 64,000 करोड़ रुपये के सामानों के ऑर्डर मिले। आपको जानकर हैरानी होगी ये आंकड़ा, वित्त वर्ष 2023-24 की तुलना में दोगुना से भी ज्यादा है। वित्त वर्ष 2023-24 में इन क्विक कॉमर्स कंपनियों से 30,000 करोड़ रुपये के सामान ऑर्डर किए गए थे। गुरुवार को जारी की गई एक रिपोर्ट में ये जानकारी दी गई है। जहां एक तरफ, क्विक कॉमर्स के बिजनेस में लगातार तेजी से बढ़ोतरी हो रही है। वहीं दूसरी ओर, इन कंपनियों की वजह से छोटे दुकानदारों का बिजनेस तेजी से खत्म होता जा रहा है।
2027-28 तक 2 लाख करोड़ रुपये पर पहुंच सकता है GOV
घरेलू रेटिंग एजेंसी केयरएज रेटिंग्स की एक यूनिट द्वारा जारी की गई इस रिपोर्ट के मुताबिक क्विक कॉमर्स कंपनियों का ग्रॉस ऑर्डर वैल्यू (GOV) वित्त वर्ष 2027-28 तक 3 गुना से भी ज्यादा होकर 2 लाख करोड़ रुपये तक पहुंचने का अनुमान है। रिपोर्ट के मुताबिक, क्विक डिलीवरी देने वाली कंपनियों ने पिछले वित्त वर्ष में सिर्फ शुल्क के तौर पर 10,500 करोड़ रुपये का भारी-भरकम रेवेन्यू कमाया, जबकि वित्त वर्ष 2021-22 में ये सिर्फ 450 करोड़ रुपये था। वित्त वर्ष 2027-28 तक शुल्क से प्राप्त रेवेन्यू के 3 गुना होकर 34,500 करोड़ रुपये पर पहुंचने की उम्मीद है।
प्रॉफिट बढ़ाने पर फोकस कर रही हैं कंपनियां
केयरएज एडवाइजरी की रिपोर्ट कहती है, ‘‘ये तेज बढ़ोतरी प्रमुख क्विक कॉमर्स कंपनियों की तरफ से प्लेटफॉर्म पर वसूले जाने वाले शुल्क में बढ़ोतरी के कारण हुई है। इस कारण मिलने वाले रेवेन्यू में तेजी आई है और कुल ऑर्डर वैल्यू भी काफी बढ़ा है।’’ रिपोर्ट के मुताबिक, क्विक डिलीवरी कंपनियां अब बहुत ज्यादा ग्रोथ से हटकर प्रॉफिट बढ़ाने पर फोकस कर रही हैं। इसके लिए विज्ञापन, ग्राहक बनाने, निजी ब्रांड की पेशकश और प्रौद्योगिकी-आधारित स्टॉक उपयोग का तरीका अपनाया जा रहा है। हालांकि, इस रिपोर्ट में ये भी सामने आया है कि क्विक कॉमर्स कंपनियों के विस्तार के बावजूद भारत की ग्रोसरी डिमांड का सिर्फ 1 प्रतिशत ही इनके हिस्से में आया है। ऐसे में, इस बिजनेस में ग्रोथ की जबरदस्त संभावनाएं हैं। Source:- https://www.indiatv.in/paisa/business/companies-like-blinkit-instamart-are-making-money-by-ruining-small-shopkeepers-they-received-orders-worth-rs-64-000-crores-in-the-last-financial-year-2025-07-10-1148362
